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Plane-MH370 |
हवाई हादसे अन्य हादसों की तुलना में बहुत कम हुए है लेकिन जितने भी हुए हैं सब के सब सुर्खियां बन गए हैं
इस आर्टिकल में आपको एक ऐसे प्लेन हादसे के विषय में जानकारी होगी जोकि अविश्वसनीय है जिसमें एक प्लेन में बैठे 239 यात्री एकाएक गायब हो गए और आजतक इस बात का पता ही नही चला कि वो लोग गायब कैसे हो गए
ये बेहद सोचने वाली बात है क्योंकि हवाई जहाज में ऐसी बहुत सी चीजें होती हैं (जैसे - कॉकपिड रिकॉर्डिंग, ब्लैक बॉक्स और ट्रैफिक कंट्रोल) इन सब के चलते प्लेन अचानक गायब नहीं हो सकता मान लीजिए ऐसा हो भी जाय तो भी हमेशा के लिए विलुप्त नही हो सकता।
लेकिन किन्तु परंतु ऐसा हुआ मलेशियन एयरलाइंस की एक फ्लाइट MH370 के साथ।
Flight-MH370-Tribute-painful-incident |
मलेशिया एयरलाइन्स की ये फ्लाइट (MH370) 8 मार्च 2014 को 227 यात्रियों को लेकर ठीक 12 बजकर 42 मिनट पर मलेशिया की राजधानी क्वालामपुर से बीजिंग के लिए प्रस्थान हुई ।
इस जहाज को ऑफिसर फ़ारिक उड़ा रहे थे और इसके रेडियो कॉम्युनिकेशन को संभालने वाले कैप्टन जाहरी आलम शाह थे शुरुआत से ही कैप्टन जाहरी की बातें सबको आसामान्य लग रही थी जैसे उन्होंने कहा-
"अब हम 35000 फ़ीट की ऊंचाई पर पहुंच गए हैं।"
जबकि उनको ऊँचाई पर पहुँचने की रिपोटिंग करनी ही नहीं थी बल्कि जब वो ऊंचाई से हटते तब रिपोर्ट करनी थी।
ठीक 1 बजकर 8 मिनट पर प्लेन मलेशिया के समुद्र तट को पार करके वियतनाम की ओर जाने लगा
और ठीक 11 मिनट के बाद मलेशिया के क्वालामपुर के एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने इस प्लेन के क्रू मेम्बर्स को एक संदेश भेजा।
"मलेशियन तीन सात शून्य हो ,चिन्ह एक दो दशमलव नौ, से सम्पर्क करें 【शुभ रात्रि】"
जाहरी ने उत्तर दिया -
" शुभ रात्रि मलेशियन तीन सात शून्य"
और यही उस प्लेन से आने वाली आखिरी आवाज थी।
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इसके बाद कई हवाई अड्डों ने सम्पर्क करने की कोशिश की लेकिन कोई लाभ न मिला क्योंकि अब वो प्लेन हमेशा हमेशा के लिए गायब हो चुका था
मलेशिया की वायुसेना के अनुसार प्लेन ने जैसे ही अंडमान सागर को पार किया वो गायब हो गया था। क्योंकि उससे सारे संबंध टूट चुके थे।
इसके रास्ते को जब विशेषज्ञों ने बारीकी से अध्ययन किया तो उन्होंने कहा ये मामला अपहरण ,एक्सीडेंट या फिर पाइलेट के आत्महत्या का नहीं हो सकता था।
क्योंकि मलेशियन सरकार ने क्रू मेंबर्स और उस प्लेन में बैठे यात्रियों का बैकग्राउंड चेक करवाया था।
आश्चर्य की बात ये भी की प्लेन अपने मार्ग से विचलित होने के पश्चात लगभग 6 घंटो तक ऑटो पाइलेट मोड पर चल रहा था
● हवाई जहाज की पहली खोज
इसकी पहली खोज दक्षिणी चीन सागर से आरम्भ हुई और
इसे खोजने के लिये 7 देशों के 34 समुद्री जहाज, 28वायुयान और कुछ सेटेलाइटों को खोज में लगाया गया था। फिर भी खोज में कहीं कुछ नहीं मिला।
● अधिक जानकारी मिलने के बाद
इसके बाद जब रास्ते की सटीक जानकारी हुई तो खोज ने मलक्का जलसंधि और अंडमान सागर की ओर रुख किया सैटेलाइट ट्रांसमिशन सिग्लनल्स के द्वारा 15 मार्च को कुछ और जानकारियां उपलब्ध हुई तो खोज को और भी बढ़ाया गया।
बाद में ऑस्ट्रेलिया ने इसके रिसर्च के सबसे बड़े भाग की जिम्मेदारी ले ली क्योंकि ये क्रैश साइट के सबसे नजदीक वाला देश था। इतना सब होते होते फ्लाइट MH370 की खोज दुनिया की सबसे महेंगी 'मरीन सर्च ' हो चुकी थी ।लेकिन अभी तक प्लेन का एक टुकड़ा भी नहीं मिल पाया था
29 जुलाई 2015 को रीयूनियन नामक एक फ्रांसीसी आइलैंड के समुद्र तट पर प्लेन का एक टुकड़ा मिला। और फिर डेढ़ साल के भीतर ही मॉरीशस, तंजानिया, मोजाम्बिक,मेडागास्कर और दक्षिण अफ्रीका के समुद्री तटों पर भी मलबे के 26 और टुकड़े मिले थे इन 27 टुकडों में से सिर्फ तीन को काफी हद तक प्लेन MH370 का माना गया ।अब जब इतने टुकड़े मिल चुके थे तो रिसर्च को हिन्द महासागर की केंद्रित किया गया था
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● खोज की समाप्ति कैसे हुई?
और अंत में मलेशिया और ऑस्ट्रेलिया की गवर्मेंट ने इसकी खोज को 2017 में बंद कर दिया। लेकिन अमेरिका की एक कंपनी ओसन इन्फिनिटी ने मई 2017 तक अपने रिसर्च को चालू रखे हुए थी।
जुलाई 2018 में मलेशिया की सरकार ने MH370 पर अपनी अंतिम रिपोर्ट जारी कर दी
सरकार ने इसमें किसी टेक्निकल खराबी की आसंका को असम्भव माना और इसे खारिज कर दिया।
एक शहर के लोगों ने इतना पाप किया कि वो पूरा शहर अपने आप को समुद्र में धांश लिया
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